न जाने क्यूँ.. नींद मेरी मुझसे रुठी रहती है.. रात भर सताती है, मुझसे दूर रहती है न जाने क्यूँ.. नींद मेरी यूँ खफ़ा रहती है, खूब मिन्नते करवाती है, तब कहीं मेरी आँखों को पनाह देती है, न जाने क्यूँ.. नींद मेरी ऐसा किया करती है.. न जाने क्यूँ... नींद मेरी ऐसा किया करती है... जब सोते हैं सब, ये मुझे जगाया करती है.. न जाने क्यूँ.. नींद मेरी ऐसा किया करती है.. सबको हसीं ख्वाब दिखाती, पर मुझसे दूर रहती है.. न जाने क्यूँ.. नींद मेरी मुझसे रूठी रहती है.. ख्वाबों में औरों को मिलवाती, पर मुझको तन्हा रखती है.. न जाने क्यूँ .. नींद मेरी ऐसा किया करती है... न जाने क्यूँ.. नींद मेरी ऐसा किया करती है.. सुबह जब उठने का समय होता है, तब मुझे अपने आगोश में लिया करती है.. न जाने क्यूँ.. नींद मेरी ऐसा किया रहती है.... #मेरेएहसास