नींद.. ..(Part 2)
न जाने क्यूँ..
नींद मेरी मुझसे रुठी रहती है..
रात भर सताती है,
मुझसे दूर रहती है
न जाने क्यूँ..
नींद मेरी यूँ खफ़ा रहती है,
खूब मिन्नते करवाती है,
तब कहीं मेरी आँखों को पनाह देती है,
न जाने क्यूँ..
नींद मेरी ऐसा किया करती है..
न जाने क्यूँ...
नींद मेरी ऐसा किया करती है...
जब सोते हैं सब,
ये मुझे जगाया करती है..
न जाने क्यूँ..
नींद मेरी ऐसा किया करती है..
सबको हसीं ख्वाब दिखाती,
पर मुझसे दूर रहती है..
न जाने क्यूँ..
नींद मेरी मुझसे रूठी रहती है..
ख्वाबों में औरों को मिलवाती,
पर मुझको तन्हा रखती है..
न जाने क्यूँ ..
नींद मेरी ऐसा किया करती है...
न जाने क्यूँ..
नींद मेरी ऐसा किया करती है..
सुबह जब उठने का समय होता है,
तब मुझे अपने आगोश में लिया करती है..
न जाने क्यूँ..
नींद मेरी ऐसा किया रहती है....
#मेरेएहसास
Awesome :) :)
ReplyDeleteThank u Amber ji☺
Delete👌👌
ReplyDeleteThank u dearie
DeleteVery nice👍👍
ReplyDeleteVery nice
ReplyDeleteThank uuu
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