नींद.. ..(Part 2)

न जाने क्यूँ..
नींद मेरी मुझसे रुठी रहती है..
रात भर सताती है,
मुझसे दूर रहती है
न जाने क्यूँ..
नींद मेरी यूँ खफ़ा रहती है, 
खूब मिन्नते करवाती है, 
तब कहीं मेरी आँखों को पनाह देती है, 
न जाने क्यूँ..
नींद मेरी ऐसा किया करती है..

न जाने क्यूँ... 
नींद मेरी ऐसा किया करती है... 
जब सोते हैं सब, 
ये मुझे जगाया करती है.. 

न जाने क्यूँ.. 
नींद मेरी ऐसा किया करती है.. 
सबको हसीं ख्वाब दिखाती, 
पर मुझसे दूर रहती है.. 
न जाने क्यूँ.. 
नींद मेरी मुझसे रूठी रहती है.. 

ख्वाबों में औरों को मिलवाती, 
पर मुझको तन्हा रखती है.. 
न जाने क्यूँ .. 
नींद मेरी ऐसा किया करती है...

न जाने क्यूँ.. 
नींद मेरी ऐसा किया करती है.. 
सुबह जब उठने का समय होता है, 
तब मुझे अपने आगोश में लिया करती है.. 

न जाने क्यूँ.. 
नींद मेरी ऐसा किया रहती है.... 

#मेरेएहसास

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